About Book
"21वीं सदी का हिंदी बाल साहित्य" एक महत्वपूर्ण पुस्तक है जो बच्चों के लिए हिंदी भाषा में लिखी गई साहित्य की महत्वपूर्ण पहचान है। यह पुस्तक बच्चों के विकास को समर्पित है और उनकी मनोबल को बढ़ाने का एक माध्यम है।"हिंदी बाल साहित्य" बच्चों को उपन्यास, कहानियाँ, कविताएँ, और नाटकों का परिचय कराती है, जो उनकी भाषा और साहित्यिक दृष्टिकोण को विकसित करने में मदद करता है।
यह पुस्तक बच्चों के लिए विभिन्न आयु समूहों के बच्चों के लिए उपयोगी होगी जैसे कि बच्चों को उपन्यासों की प्रवृत्ति तो किशोरों के लिए यह कहानियाँ और गद्य लेखों की दिशा में उनकी रुचि बढ़ा सकता है।"21वीं सदी का हिंदी बाल साहित्य" न केवल मनोरंजन प्रदान करती है, बल्कि यह शिक्षा और मनोबल को बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण साधन भी है। इस पुस्तक के माध्यम से बच्चे न केवल भाषा कौशल को सुधार सकते हैं, बल्कि उनकी विचारधारा को भी विकसित कर सकते हैं।
हिंदी बाल साहित्य" के माध्यम से बच्चों को अपनी सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को समझने का मौका मिलता है। यह पुस्तक बच्चों को हिंदी भाषा के महत्व को समझाती है और उन्हें अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व महसूस कराती है।
इस पुस्तक में बच्चों के लिए रोमांचक कहानियाँ और प्रेरणादायक कविताएँ शामिल हैं, जिनसे वे न केवल मनोरंजन कर सकते हैं, बल्कि अच्छे संवादना कौशल को भी विकसित कर सकते हैं। इसके साथ ही, वे नए विचारों के साथ परिचय करते हैं और उनकी जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं।"21वीं सदी का हिंदी बाल साहित्य" बच्चों को अद्वितीय रूप से भारतीय साहित्य की धरोहर से मिलाती है, जिसमें कहानियों के माध्यम से उन्हें महाकवि कालिदास, तुलसीदास, प्रेमचंद, और अन्य महान कवियों के उत्कृष्ट कृतियों से रूबरू कराती है।
यह पुस्तक बच्चों के समग्र मनोबल को सुधारने और उनकी मनोवैज्ञानिक दिशा को विकसित करने के साथ-साथ, उन्हें समृद्धि और संवृद्धि की दिशा में मार्गदर्शन करेगी।
About Author
शिक्षाविद, साहित्यकार और प्रमुख समाजसेवी प्रोफेसर मीना यादव का जन्म 10 जनवरी,1967 को उत्तर प्रदेश के एटा जनपद में हुआ। और यही से प्राथमिक तथा माध्यमिक शिक्षा पूरी कर उच्च शिक्षा हेतु सेंट जॉन्स कॉलेज आगरा में बी.ए. में प्रवेश लिया। पीएच.डी .(हिंदी)आगरा विश्वविद्यालय आगरा से प्राप्त करने के उपरांत लोक सेवा आयोग उत्तर प्रदेश से चयनित होकर 1997 में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बागेश्वर तथा उधम सिंह नगर में वर्ष 2001 तक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।तदोपरांत उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग से चयनित होकर 2001 में बरेली कॉलेज बरेली में कार्यभार ग्रहण किया और वर्तमान में प्रोफ़ेसर एवं अध्यक्ष -हिंदी विभाग के पद पर कार्यरत हैं।आपके शोध निर्देशन/मार्गदर्शन में एक दर्जन से अधिक शोधार्थी अपना शोध कार्य पूरा कर चुके हैं और वर्तमान में भी कई छात्र शोधरत् हैं। अब तक आपकी 16 पुस्तकें तथा 60 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं । एक राष्ट्रीय सेमिनार एवं एक अंतरराष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन आप द्वारा किया गया है। प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में आपके लिखे आलेख निरंतर प्रकाशित होते रहते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए आई. आई. एफ. सोसायटी द्वारा आपको शिक्षा रत्न पुरस्कार प्रदान किया गया है। वर्ष 2023 में एशियन रिसर्च फाउंडेशन और शोध प्रकाशन के संयुक्त तत्वावधान में आपको साहित्य गौरव सम्मान-2023 तथा प्रकृति फाउंडेशन मेरठ द्वारा बेस्ट ऑफ द ईयर अवार्ड प्रदान किया गया है। दैनिक जागरण ( आई नेक्स्ट) बरेली संस्करण द्वारा आपको नारी टुडे अवॉर्ड्स से विभूषित किया गया है। उत्कृष्ट अकादमिक सहभागिता के साथ सामाजिक कार्यों में भी आपकी गहन रुचि है। नारायण सेवा संस्थान उदयपुर के आयोजनों में आर्थिक सहयोग राशि से 50 से अधिक सफल ऑपरेशन किए जा चुके हैं। हिंदी को वैश्विक भाषा का दर्जा कैसे प्राप्त हो, आप अपने लेखन में/ आयोजनों में प्रखर रूप से हिंदी के पठन-पाठन को उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य करने को प्राथमिकता देती हैं। मॉरीशस में आयोजित 11वें