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ISBN : 978-93-7462-325-1

Category : Non Fiction

Catalogue : Self Help

ID : SB22340

Nature Nurture Neurons

A Key To Mental Wellness

Neeru Gupta

Paperback

219.00

e Book

149.00

Pages : 84

Language : Hindi

PAPERBACK Price : 219.00

About Book

जैसा कि हम सभी जानते हैं, किसी भी देश का भविष्य उसकी आने वाली पीढ़ियों पर निर्भर करता है। किसी भी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करने और जीवन में सफलता हासिल करने के लिए शारीरिक रूप से स्वस्थ और सुदृढ़ होना जितना आवश्यक है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण मानसिक रूप से स्वस्थ और संतुलित होना है। एक स्वस्थ मस्तिष्क ही सही सोचने, निर्णय लेने, चुनौतियों का सामना करने और परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता प्रदान करता है। Nature Nurture Neurons पुस्तक एक प्रभावशाली और प्रवाहपूर्ण रूप से लिखी गई पुस्तक होने का दावा नहीं करती है, अपितु इस पुस्तक के माध्यम से मैं पाठकों का ध्यान आजकल तेजी से उभर रही उन समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहूँगी, जिनका सामना हमारे मासूम बच्चों को करना पड़ रहा है। माता-पिता के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ईर्ष्या और एक-दूसरे से स्वयं को श्रेष्ठ साबित करने की होड़ का सीधा प्रभाव बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर पड़ रहा है। कोई भी कार्य अचानक नहीं होता—हर कार्य पहले विचार के रूप में जन्म लेता है, फिर उसकी कल्पना, योजना और निर्णय मस्तिष्क में बनते हैं, और उसके बाद वह व्यवहार और कर्म के रूप में बाहर दिखाई देता है। इसलिए, बच्चों और युवाओं के समग्र विकास के लिए उनके शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी समान रूप से ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है। आजकल बच्चे अपने दोस्तों के बीच बातचीत करते समय अक्सर ऐसे शब्दों का प्रयोग करते दिखाई देते हैं—“यार, मैं बहुत स्ट्रेस में हूँ”, “मुझे हमेशा एंग्जायटी रहती है”, “मुझे डिप्रेशन हो गया है” या “मैं अपने काम लगातार प्रोक्रास्टिनेट कर रहा हूँ।” इन शब्दों का बढ़ता हुआ प्रयोग केवल बदलती भाषा का संकेत नहीं है, बल्कि यह हमारे बच्चों के मानसिक और भावनात्मक संसार में हो रहे बदलावों की ओर भी ध्यान आकर्षित करता है। जो भी कहिए जनाब, यहाँ बात केवल मानसिक बीमारी की हो रही है, जिसे ठीक करने के लिए आजकल कोच, कंसल्टेंट, साइकैट्रिक, साइकोलॉजिस्ट, डिफरेंट डिपार्टमेंट खुल गए। और वहाँ पर इतने योग्य और काबिल लोग भी हैं, जो कि आपके बच्चे को पूर्ण रूप से मानसिक रोग से छुटकारा दिलाने में समर्थ हैं। परंतु एक सेकेंड के लिए रुककर हम पैरेंट्स को अपने आप से एक प्रश्न पूछने की जरूरत है कि हम अपनी इच्छाओं के चलते अपने बच्चों को जो मानसिक रोगी बना रहे हैं क्या वह बिल्कुल ठीक है? ऐसी परिस्थितियों को ही उत्पन्न क्यों होने दिया जा रहा है जिसकी वजह से उन्हें इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अंग्रेज़ी में एक कहावत है, Precaution is better than cure. इस पुस्तक के माध्यम से मैंने पाठकों का ध्यान मानसिक रोग के उत्पन्न होने के कारणों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया है। अंत में कुछ सुझाव भी दिए गए हैं जिन पर अमल कर लेने से इस रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है। धन्यवाद।


About Author

जन्म होते ही मेरे शरीर का नाम नीरू रखा गया और अब तक की जीवन-यात्रा में मेरी मुख्य भूमिका एक गृहिणी की रही है। हाल ही में मैंने मानसिक स्वास्थ्य कोच एवं उपचारक के क्षेत्र में अपना पहला कदम रखा है। प्रत्येक मनुष्य इस संसार में अपने अनुभवों से कुछ न कुछ सीखता हुआ जीवन बिताता है। इस प्रकार हर व्यक्ति विशेष के पास अपनी जीवन गाथा में से कुछ न कुछ कहने या सुनाने का विषय जरूर होता है। लेकिन केवल जीवन की कहानी को कह देना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उसमें कुछ ऐसी असाधारण घटनाओं का वर्णन भी होना चाहिए, जिनसे अन्य लोगों को भी अपने जीवन में आई समस्याओं का हल मिल सके। मुझे कभी यह ख्याल भी नहीं आया था कि मैं एक दिन कोई किताब भी लिखूँगी। मेरे जैसी एक साधारण गृहिणी के लिए यह अनुभव न केवल असाधारण रहा है बल्कि अत्यंत रोमांचक भी रहा है। स्वाभाविक रूप से इसने मुझे मेरे जीवन का आत्मनिरीक्षण करने के लिए प्रेरित किया है। जिस मानव प्रजाति में हमारा जन्म हुआ है उसके प्रति हम सबका एक दायित्व भी है। इसी सोच के साथ मैंने इस किताब की रचना की है। अब तक के जीवन में मैंने जो कुछ भी अनुभव किए हैं, उसका लिखित विवरण न केवल हमारी आने वाली पीढ़ी के मानसिक विकास में सहायक हो सके बल्कि शोध के क्षेत्र में भी अपना योगदान दे सके। इसी कर्तव्यबोध की भावना के साथ इस किताब की रचना की गई है। अब यह पाठको को तय करना है कि मेरे निजी अनुभव उनके जीवन में कितने उपयोगी सिद्ध होते हैं। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वह आप सभी को खुशियों से परिपूर्ण रखे। धन्यवाद।.

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