ISBN : 978-93-7462-259-9
Category : Non Fiction
Catalogue : Poetry
ID : SB22304
Paperback
219.00
e Book
99.00
Pages : 115
Language : Hindi
कभी किसी की आंखों में एक दरिया देखा है? कभी किसी शहर में जाने से सिर्फ़ इसलिए बचे हैं कि लौटना मुश्किल होगा? "नामालूम सा मैं" एक ऐसे शख़्स की डायरी है जो ख़ुद को अब भी पूरी तरह नहीं जानता, कभी इश्क़ की पहली धड़कन में, कभी उसी इश्क़ के धोखे में, कभी अपने आईने के सामने अकेला खड़ा, कभी दुनिया के दस्तूर पर सवाल उठाता, कभी किसी अपने को खोने के ग़म में डूबा, और आख़िर में, एक हल्की सी उम्मीद थामे हुए। ये किताब जवाब नहीं देती। ये सिर्फ़ साथ चलती है, उन सारे मौसमों से जिनसे हर कोई कभी न कभी गुज़रता है।