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ISBN : 978-93-7462-736-5

Category : Fiction

Catalogue : Self Help

ID : SB21991

मन–शरीर का संवाद

संकेतों, भावनाओं और NLP तकनीकों से Anxiety और Stress में राहत

Arvind Gedam

Paperback

199.00

e Book

199.00

Pages : 79

Language : Hindi

PAPERBACK Price : 199.00

About Book

(Foreword) हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ थकान को सामान्य मान लिया गया है, बेचैनी को आदत कह दिया गया है, और मन के शोर को “ज़िंदगी का हिस्सा” समझकर अनदेखा कर दिया जाता है। लेकिन मन और शरीर कभी बिना कारण प्रतिक्रिया नहीं करते। वे हमेशा कुछ कहना चाहते हैं — बस हम सुनना भूल जाते हैं। “मन–शरीर का संवाद” में Arvind Gedam ने इसी भूली हुई भाषा को बड़े ही सरल, संवेदनशील और ईमानदार शब्दों में सामने रखा है। यह पुस्तक इलाज का दावा नहीं करती, बल्कि जागरूकता का निमंत्रण देती है। यह हमें यह समझने में मदद करती है कि Anxiety, Stress, Overthinking और Procrastination कोई व्यक्तिगत कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर के संकेत हैं — जो सुरक्षा, समझ और ठहराव चाहते हैं। इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नरमी है। यहाँ न तो पाठक को बदला जाता है, न सुधारा जाता है — बल्कि समझा जाता है। लेखक ने NLP तकनीकों को भी किसी जटिल सिद्धांत की तरह नहीं, बल्कि जीवन में सहज रूप से अपनाई जा सकने वाली प्रक्रियाओं के रूप में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक उन लोगों के लिए है जो बाहर से “सब ठीक” दिखते हैं, लेकिन भीतर बहुत कुछ संभाल रहे होते हैं। जो खुद से लड़ते-लड़ते थक चुके हैं, और अब खुद को समझना चाहते हैं। पाठक से मेरा निवेदन है — इस पुस्तक को जल्दी में न पढ़ें। इसे महसूस करें। जहाँ मन थकता है, वहाँ रुकें। जहाँ शरीर संकेत देता है, वहाँ सुनें। और Arvind Gedam को मेरी शुभकामनाएँ — आपने एक ऐसी पुस्तक रची है जो शोर नहीं मचाती, बल्कि मौन में भी समझ पैदा करती है। यह केवल एक पुस्तक नहीं है — यह मन और शरीर के बीच फिर से संवाद शुरू करने का एक शांत प्रयास है। सादर, Dr. Yogendra Singh Rathore NLP Master Practitioner | World Book of Records Holder | Times 40 Under 40 Awardee


About Author

लेखक परिचय (About the Author) अरविंद गेडाम एक विचारशील लेखक हैं, जिन्हें मन, शरीर और अवचेतन मन के आपसी संबंधों को समझने और शब्दों के माध्यम से प्रस्तुत करने में गहरी रुचि है। उनकी पुस्तक मन–शरीर का संवाद एक NLP आधारित फिक्शन कृति है, जो कहानी के माध्यम से आत्मसंवाद, मानसिक जागरूकता और आंतरिक परिवर्तन की यात्रा को दर्शाती है। लेखक का मानना है कि जब मन और शरीर के बीच संवाद स्थापित होता है, तब जीवन में संतुलन और स्पष्टता संभव होती है। अरविंद गेडाम अपने लेखन के जरिए पाठकों को स्वयं को समझने और सकारात्मक बदलाव की ओर प्रेरित करते हैं।

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