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ISBN : 978-93-7462-329-9

Category : Fiction

Catalogue : Historic

ID : SB22109

ऐतिहासिक, पौराणिक, धार्मिक गाथाओं की संगम नगरी, "छत्तीसगढ़ का तीर्थराज- विजयगढ़ (किला)"

छत्तीसगढ़ का तीर्थराज- विजयगढ़ (किला)

परमेश्वर प्रसाद सिम्हा (पवन कुमार जायसवाल)

Paperback

249.00

e Book

149.00

Pages : 90

Language : Hindi

PAPERBACK Price : 249.00

About Book

About Book स्वस्थ, सफल, समुन्नत एवं सुमधुर जीवन जीने का प्रथम एवं अंतिम अर्थात एकमेव सूत्र है- "अपने जड़ों से जुड़े रहना"। क्योंकि जो भी वृक्ष चाहे वह कितना ही प्राचीन, विशाल ,एवं समृद्ध ही क्यों ना हो? यदि वह अपने मूल जड़ों से पृथक होकर अपनी एक अलग पहचान बनाने की चेष्टा करें,वह शीघ्र ही विनष्ट हो जाता है। ठीक उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने अतीत के स्वर्ण गाथाओं से जुड़े रहना चाहिए। आजकल समाज में व्यक्ति के नैतिक, आध्यात्मिक, सामाजिक पतन का जो मूल कारण है, वह है व्यक्ति अपने इतिहास की समृद्ध विरासत से पृथक होकर कट सा गया है। छत्तीसगढ़ 36 अलग-अलग गढ़ों का विसद एवं वृहद राज्य रहा है। जिसके प्रत्येक गढ़ों की अपनी-अपनी समृद्ध गाथाएं रही हैं। प्रस्तुत ग्रंथ "धर्मनगरी -विजयपुर (किला)" इन्हीं छत्तीस में से एक प्रमुख गढ़ "विजयगढ़" के पौराणिक, ऐतिहासिक गाथाओं व लोकमान्यताओं की एक समृद्ध श्रृंखला है। जिसमें विजयगढ़ (किला) के अति प्राचीन पौराणिक काल तदुपरांत ईसा पूर्व 300 से लेकर वर्तमान तक के गाथाओं व स्वर्णिम इतिहास का रोचक सम्मिश्रण किया गया है।


About Author

About author प्रकृति के चतुर चित्रकार, संस्कृति,साहित्य एवं शिक्षा के सुकुमार उपासक, समर्पित शिक्षक लौकिक- वैदिक एवं ऐतिहासिक गाथाओं को एक नवीन दिशा दृष्टि प्रदान करने वाले कलमकार श्री पवन कुमार जायसवाल (परमेश्वर प्रसाद) जी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी दिन शनिवार विक्रम संवत 2041 तदनुसार 7 अप्रैल सन् 1984 ई. को छत्तीसगढ़ राज्य अंतर्गत तत्कालीन बिलासपुर वर्तमान मुंगेली जिले के ऐतिहासिक पौराणिक ग्राम पैजनियां के परम धार्मिक दंपत्ति श्री खोरबहरा राम जायसवाल -श्रीमती रामप्यारी जायसवाल जी के आंगन में हुआ। आपके साकेतवासी दादा -दादी जी श्री रामाधीन जायसवाल -श्रीमती कुंवरिया बाई जायसवाल के स्नेह सिंचन एवं परिवरिश के कारण आपकी रुचि बाल्यकाल से ही संस्कृति एवं प्रकृति के गूढ़तम रहस्यों के अध्ययन -संरक्षण पर रही है। श्री रामचरितमानस एवं श्रीमद् भागवत के शीर्षस्थ विद्वान, गृहस्थ संत,परम धार्मिक पूज्यपाद पंडित श्री शिव कुमार पांडेय जी पीपरखुंटी (बरपाली) के संरक्षण व मार्गदर्शन में आपकी आध्यात्मिक- धार्मिक एवं साहित्य यात्रा प्रारंभ हुई और अत्यंत अल्पावस्था में ही आप श्रीराम कथा का वाचन करने लगे। कालांतर में आपकी दीक्षा चित्रकूट तुलसी पीठाधीश्वर पूज्यपाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज से हुई। आपके जीवन में आपके आध्यात्मिक शिक्षा गुरु पंडित श्री शिव कुमार पांडेय जी महाराज एवं दीक्षा गुरु पूज्यपाद जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज उक्त दोनों महापुरुषों की अमिट छाप रही है।आपके द्वारा आदिवासी एवं वनांचल क्षेत्र में श्री राम कथा के विस्तार, धर्म की स्थापना से सामाजिक उत्थान, कुरीतियों के निवारण व सामूहिक विवाह आदि के सार्थक सफल प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में आप प्राथमिक शाला शिक्षक के रूप में सेवारत रहते हुए छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायन शैली में श्री रामचरितमानस एवं महाभारत की कथाओं का गायन व प्रवचन करते हैं तथैव "पेड़ नहीं हम प्राण लगाबो" नामक स्वयंसेवी समूह का गठन कर प्रकृति संरक्षण एवं पौधा रोपण पर भी कार्य किया जा रहा है।आपके समूह के प्रकृति सेवक भारत के 27 - 28 राज्यों में निःशुल्क एवं निःस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।आपके समूह द्वारा दहिमन, बड़ी हिंगलाज, गरुड़, कर्कट, लक्ष्मण फल, हनुमान फल, श्योनक, गुलाब जामुन, भोजपत्र, रुद्राक्ष, भद्राक्ष, कुमकुम आदि असंख्य दुर्लभ व विलुप्तप्राय वनस्पतियों के पौधे पूरे भारत में निःशुल्क भेजे जाते हैं।आपके समूह द्वारा राष्ट्रपति भवन, श्री राम मंदिर अयोध्या, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर बनारस, जगन्नाथ मंदिर - कोणार्क सूर्य मंदिर उड़ीसा, वैष्णो देवी मंदिर जम्मू कश्मीर, अमरनाथ मंदिर प्रमुख द्वार सैन्य कैंप पहलगाम, सोमनाथ मंदिर गुजरात, बाबा बैजनाथ धाम देवघर झारखंड, प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर - बोधगया मंदिर गया जी बिहार आदि अनेकानेक सुप्रसिद्ध स्थलों सहित पशुपतिनाथ मंदिर नेपाल व हिंगलाज माता मंदिर पाकिस्तान में भी विभिन्न दुर्लभ व विलुप्तप्राय वनस्पतियों का रोपण किया जा चुका है। साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में भी आपकी बाल कविताएं, लघु कथाएं एवं रचनाएं समय पर विभिन्न बाल पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। "धर्मनगरी - विजयपुर (किला)" आपकी ऐतिहासिक, धार्मिक, पौराणिक एवं लोक मान्यताओं पर आधारित महत्वपूर्ण ग्रंथ है।

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